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2019 : दिल्ली में केजरीवाल के अनशन से इस वजह से दूर है कांग्रेस

नई दिल्ली

बीजेपी के खिलाफ 2019 में विपक्षी दलों का मोर्चा इतना आसान नहीं रहने वाला है। दिल्ली सरकार और एलजी के बीच चल रहे विवाद के बीच कांग्रेस पार्टी ने एक लक्ष्मण रेखा खींचकर इसे साबित भी कर दिया है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि 2019 लोकसभा चुनावों + में बीजेपी को मात देने के लिए कांग्रेस को क्षेत्रीय दलों को साथ लेकर चलना होगा। पार्टी शीर्ष नेतृत्व का यह भी मानना है कि विपक्षी एकता की कोशिशों के साथ ही कांग्रेस को सभी जरूरी मुद्दों पर अपनी स्थिति भी मजबूती के साथ दिखाने की जरूरत है।

एलजी दफ्तर पर अपने मंत्रियों के साथ धरने पर बैठे अरविंद केजरीवाल + को 4 गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों का समर्थन मिला है। चंद्रबाबू नायडू, पी. विजयन, ममता बनर्जी के साथ कांग्रेस के सहयोग से सीएम बने एचडी कुमारस्वामी भी इसमें शामिल हैं। इसके बावजूद कांग्रेस ने सीधे तौर पर अरविंद केजरीवाल को समर्थन देने से अपनी दूरी बनाकर रखी है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं का मानना है कि इन 4 मुख्यमंत्रियों का सीधे तौर पर दिल्ली में चुनावी गणित से कोई लेना-देना नहीं है। कांग्रेस हाई कमान का मानना है कि पार्टी के लिए दिल्ली एक अहम राज्य है और इसलिए दिल्ली के वोटरों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस पार्टी को अपनी स्थिति इनसे अलग रखनी होगी। दिल्ली कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन का कहना है, ‘चार मुख्यमंत्रियों ने केजरीवाल के लिए अपना समर्थन दिया है, लेकिन यहां एक बात नहीं भूलनी चाहिए कि दिल्ली के स्थानीय चुनावों में इन चारों में से किसी की पार्टी की कोई भागीदारी नहीं है। हमारा यह भी मानना है कि समर्थन देने या नहीं देने के फैसले का राष्ट्रीय स्तर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला है।’

बता दें कि पिछले सप्ताह ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आप के साथ गठबंधन की सभी संभावनाओं को खारिज कर दिया था और कहा था कि आप के साथ पूर्व में आरएसएस के करीबी लोग जैसे रामदेव और किरण बेदी जुड़े रह चुके हैं। कुमारस्वामी के केजरीवाल सरकार को समर्थन देने के फैसले पर भी कांग्रेस के पास अपना तर्क है। कांग्रेस का कहना है कि कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण में केजरीवाल गए थे और उसी के बदले सम्मान के तौर पर उन्हें समर्थन दिया है।

एक और कांग्रेस नेता का कहना है कि विपक्षी एकता को झटका लगने जैसी बात केजरीवाल के इस केस में लागू नहीं होती है और हमें नहीं लगता है कि 2019 में इसका कोई प्रभाव पड़ेगा। हमारे सहयोगी अखबार इकनॉमिक टाइम्स से एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा, ‘हमें नहीं लगता है कि विपक्षी एकता को लेकर इस मुद्दे से कोई फर्क पड़ने वाला है। केंद्र के साथ तकरार को लेकर केजरीवाल अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं। यह राष्ट्रीय राजनीति से जुड़ा मुद्दा नहीं है।’

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