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450 साल से था बंद, योगी ने खोला अक्षयवट

प्रयागराज

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज में यमुना नदी पर स्थित मुगलकालीन किले में 450 वर्ष से बंद अक्षयवट और सरस्वती कूप को गुरुवार को आम जनता के लिए खोल दिया। मुख्यमंत्री योगी ने यह भी कहा कि इस बार कुंभ मेले में छह प्रमुख स्नान पर्वों पर वीवीआईपी के लिए कोई भी प्रोटोकॉल उपलब्ध नहीं होगा।

मेला क्षेत्र में बने मीडिया सेंटर का उद्घाटन करने के बाद मुख्यमंत्री ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा, ‘गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की इस त्रिवेणी में देश-दुनिया से कोटि-कोटि श्रद्धालु खिंचे चले आते हैं। आस्था का सम्मान करने के प्रयास में प्रधानमंत्री की प्रेरणा से 450 वर्ष बाद अब श्रद्धालुओं को अक्षयवट के दर्शन का सौभाग्य मिलेगा। अक्षयवट तक हर श्रद्धालु जा सकेगा और इसका दर्शन करने के साथ ही सरस्वती कूप और मां सरस्वती की भव्य प्रतिमा के भी दर्शन कर सकेगा।

17 जनवरी को प्रयागराज पहुंचेंगे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
मुख्यमंत्री ने बताया कि 17 जनवरी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद प्रयागराज आएंगे और महर्षि भारद्वाज की स्मृति में बने उद्यान में लगाई गई उनकी प्रतिमा का अनावरण करेंगे। योगी ने बताया कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए पहली बार 1200 से अधिक प्रीमियम कॉटेज टेंट सिटी का विकास किया गया है। इस बीच विदेश मंत्रालय से मिली जानकारी में कहा गया है कि कुंभ मेला और गणतंत्र दिवस समारोह को देखते हुए 15वां प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन 9 जनवरी के स्थान पर 21 से 23 जनवरी 2019 तक वाराणसी में आयोजित किया जा रहा है। कहा गया है कि इस सम्मेलन के बाद, प्रवासियों को 24 जनवरी, 2019 को कुंभ मेले के लिए प्रयागराज जाने और 26 जनवरी 2019 को नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड का साक्षी होने का अवसर दिया जाएगा।

मेले के दौरान अति विशिष्ट लोगों के आगमन से आम लोगों को असुविधा होने के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा, ‘छह प्रमुख स्नान पर्वों पर किसी भी वीवीआपी को प्रयागराज में कोई भी प्रोटोकॉल प्रदान नहीं होगा।’ मुख्यमंत्री ने इससे पूर्व खुसरोबाग में पुनरुद्धार कार्यों का उद्घाटन किया और एक अन्य कार्यक्रम में स्वच्छाग्रहियों को सम्मानित कर उनके बीच किट वितरित किया।

यहां रहती हैं सरस्वती
संगम वह स्थान है, जहां गंगा-यमुना-सरस्वती तीनों नदियों आकर मिलती हैं लेकिन सरस्वती नदी के लुप्त हो जाने के बाद यहां केवल गंगा और यमुना का मिलन होता है। कहा जाता है कि प्रयागराज स्थित अकबर के किले मे सरस्वती आज भी मूर्त रूप में दिखाई देती हैं। बताया जाता है कि 30 साल पहले इस कूप में रंग डाला गया था। वह रंग संगम पर भी दिखाई दिया था। यानी इस कूप का सीधा जुड़ाव संगम के साथ है। इसे भी अब आम लोगों के दर्शन के लिए खोल दिया गया है।

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