Monday , July 16 2018
Breaking News
होम / अंतरराष्ट्रीय (page 2)

अंतरराष्ट्रीय

कंगाली की कगार पर पाकिस्तान! भारतीय रुपये से आधी हो गई करेंसी की कीमत

नई दिल्ली ईद के त्योहार के कुछ दिनों पहले ही पड़ोसी देश पाकिस्तान की आर्थिक चिंताएं काफी बढ़ गई हैं. पिछले कुछ समय से लगातार पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था गोते लगा रही है, इसके साथ ही कर्ज का दबाव भी बढ़ रहा है. मंगलवार के आंकड़ों के अनुसार, एक अमेरिकी डॉलर के …

Read More »

गे हैं इमरान खान, कई लोगों संग संबंध: पूर्व पत्नी

इस्लामाबाद यौन उत्पीड़न के आरोप के बाद अब रेहम खान ने अपने पूर्व पति इमरान खान पर समलैंगिक होने का आरोप लगाया है। रेहम ने अपनी आने वाली किताब में दावा किया है कि इमरान समलैंगिक हैं और उनके अपनी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के कई सदस्यों से संबंध हैं। पाकिस्तानी …

Read More »

जी 7: ट्रंप के ट्वीट पर बवाल, अमेरिका vs यूरोप हुआ मामला

फ्रैंकफर्ट जी 7 सम्मेलन के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के ट्वीट पर बवाल बढ़ता जा रहा है। अब यह मामला अमेरिका बनाम यूरोप की लड़ाई बनता जा रहा है। जर्मनी के विदेश मंत्री मेको मास ने कहा कि ट्रंप ने जी 7 सम्मेलन के बाद एक संयुक्त बयान से …

Read More »

वुहान पार्ट-2: मोदी के बुलावे पर 2019 में भारत आएंगे शी

किंगदाओ (चीन) वुहान समिट की तर्ज पर अगले साल चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के लिए भारत आएंगे । चीन के राष्ट्रपति ने इस बाबत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्योते को स्वीकार कर लिया है। विदेश सचिव विजय गोखले ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान …

Read More »

करगिल युद्ध को लेकर क्‍ल‍िंटन ने शरीफ को चेताया था, किताब में नए खुलासेअमेरिका के साउथ एश‍िया के देशों खासकर भारत, पाकिस्‍तान और अफगानिस्‍तान के साथ संबंधों पर लिखी गई श्रीनाथ राघवन की किताब सुर्खियों में है. ‘The Most Dangerous Place’ में करगिल युद्ध और कश्‍मीर को लेकर भी कई नए खुलासे किए गए हैं.इस किताब में कहा गया है कि करगिल युद्ध से पहले अमेरिकी के तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति बिल क्‍ल‍िंटन ने नवाज शरीफ को नसीहत दी थी कि वह भारत के साथ युद्ध में न जाए. किताब के अनुसार 1998- 99 की सर्दी में पाकिस्‍तानी सेना ने एलओसी के उत्‍तरी भाग और भारत के हिस्‍से के करगिल इलाके में कब्‍जा कर लिया था. उससे पहले तक जबकि ठंड के मौसम में दोनों देशों की सेनाएं इस पोस्‍ट को खाली कर दिया करती थीं. ऐसे में पाकिस्‍तान एक कमांडिंग पॉजिशन पर कब्‍जा कर चुका था और इसके साथ ही इस हिस्‍से में भारत के नियंत्रण पर खतरा मंडराने लगा था. इसके पीछे पाकिस्‍तान का मकसद कश्‍मीर में विद्रोह को बढ़ावा देना भी था. इस ऑपरेशन को पाकिस्‍तान के तत्‍कालीन आर्मी चीफ परवेज मुशर्रफ के आदेश पर अंजाम दिया गया था. हालांकि अब तक इस बात को लेकर अबतक संदेह क‍ि इस ऑपरेशन की जानकारी पाकिस्‍तान के तत्‍कालीन पीएम नवाज शरीफ को थी या नहीं और थी तो किस हद तक. किताब में लिखा गया है कि वॉश‍िंगटन को भी इस ऑपरेशन की जानकारी हो गई थी और उसके लिए यह काफी चिंता का विषय था. क्‍लिंटन सरकार को चिंता सता रही थी कि कहीं भारत एलओसी के पार स्‍ट्राइक न शुरू कर दे. किताब के अनुसार अगर भारत ऐसा करता तो इसके बड़े परिणाम सामने आ सकते थे. साथ ही अमेरिका को डर सता रहा था कि तीसरे देश भी इस युद्ध का हिस्‍सा बन सकते थे. चीन और अरब देश जहां पाकिस्‍तान के साथ खड़े होते तो भारत के साथ रूस और इजरायल. साथ ही इस युद्ध में परमाणु हथ‍ियारों का भी इस्‍तेमाल हो सकता था. किताब में लिखा गया है कि 3 जुलाई 1999 को नवाज शरीफ अपने परिवार के साथ अमेरिका के यात्रा पर पहुंचे थे. उस समय तक अमेरिकी खुफ‍िया सूत्रों को जानकारी मिल गई थी कि पाकिस्‍तानी परमाणु हथ‍ियारों को तैनात करने की योजना पर काम कर रहा है. क्‍ल‍िंटन के अध‍िकारी टेलबॉट के अनुसार यह समय काफी जोखिम भरा था. ऐसे में अमेरिका के नैशनल सेक्‍योरिटी एडवाइजर सैंडी बर्गर ने अमेरिकी राष्‍ट्रपति क्‍ल‍िंटन को सलाह दी कि मुलाकात में नवाज शरीफ से पाकिस्‍तानी सेना को पीछे हटाने को कहे और साथ ही शरीफ को सत्‍ता में रखने कोश‍िश करें. ऐसा इसलिए कहा गया क्‍योंकि नवाज शरीफ सपरिवार अमेरिका पहुंचे थे तो यह संदेश साफ था कि उन्‍हें पाकिस्‍तान में अपनी पोजिशन का पूरा भरोसा नहीं है. टेलबॉट के अनुसार उस समय क्‍ल‍िंटन के लिए भारत से भी रिश्‍ते सुधारने पर ध्‍यान देना जरूरी था. किताब के अनुसार 4 जुलाई को हुई बैठक में क्‍ल‍िंटन ने यह साफ कर दिया कि पाकिस्‍तान के पीछे हटने को कश्‍मीर मामले में अमेरिकी दखल से जोड़कर न देखा जाएगा. हालांकि नवाज शरीफ ने मांग रखी कि पाकिस्‍तान पीछे हटने के लिए तैयार है, लेकिन भारत को वादा करना होगा कि वह कश्‍मीर मुद्दे का हल एक टाइम फ्रेम के अंदर करेगा. क्‍ल‍िंटन ने इसका जवाब दिया था कि अगर वह भारत के पीएम होते तो ऐसा करने को कभी तैयार नहीं होते. साथ ही क्‍ल‍िंटन ने शरीफ को बिना सोचे समझे पाकिस्‍ताना को युद्ध में झोंकने के खतरे से भी आगाह कराया. 26 जुलाई को पाकिस्‍तान के घुसपैठिये एलओसी के पीछे हट गए. हालांकि अक्‍टूबर 1999 में जनरल परवेज मुशर्रफ ने शरीफ को सत्‍ता से बेदखल कर दिया था. इसके बाद अमेरिका और पाकिस्‍तान के रिश्‍तों में खटास आने लगी. वहीं उसी वक्‍त अमेरिका और भारत के रिश्‍ते सुधरने लगे थे. क्‍ल‍िंटन भी भारत दौरे पर आने को उत्‍सुक थे. इसके साथ ही अक्‍टूबर 1999 के अंत तक अमेरिका ने भारत पर से कई प्रत‍िबंध हटा दिए, वहीं पाकिस्‍तान पर कई प्रतिबंध लगा दिए. अमेरिका यह दिखाना चाह र‍हा था कि वह परमाणु संपन्‍न होने के बावजूद लोकतांत्रिक भारत के साथ वह रिश्‍ते मजबूत करना चाहता है न कि पाकिस्‍तान के सैन्‍य तानाशाह के साथ. इस किताब में 1990 के कश्‍मीर में मौजूद हालात का भी जिक्र है. किताब में लिखा है कि 1990 के शुरुआत सालों में पाकिस्‍तान कश्‍मीर में हालात बिगाड़ने की कोश‍िश कर रहा था. भारत ने पाकिस्‍तान पर आरोप लगाए थे कि वह कश्‍मीरी आतंकियों को ट्रेनिंग देकर भारत के ख‍िलाफ एक छद्म युद्ध शुरू करने की कोशिश कर रहा है. उस दौरान पाकिस्‍तान के आर्मी चीफ और राष्‍ट्रपति से सलाह लेकर तत्‍कालीन पीएम बेनजीर भुट्टो ने अपने अध‍िकारी याकूब खान को भारत भेजा था. याकूब ने उन बैठकों में धमकी भरे शब्‍दों का उल्‍लेख करते हुए कश्‍मीर पर पाकिस्‍तान का पक्ष रखा था. ऐेसे में भारत के तत्‍कालीन पीएम वीपी सिंह ने भी जवाब साफ कर दिया था कि अगर पाकिस्‍तान परमाणु क्षमता का इस्‍तेमाल सैन्‍य गत‍िविध‍ियों के लिए करता है तो वह भी अपने शांतिपूर्ण परमाणु पॉलिसी पर दोबारा विचार करेगा. उस दौरान भारतीय खुफिया तंत्रों को यह भी सूचना मिली थी कि पाकिस्‍तान उत्‍तरी पंजाब में हमले की योजना बना रहा है. इस किताब के अनुसार, 13 मार्च 1990 को भुट्टो ने पाकिस्‍तान अध‍िकृत कश्‍मीर पहुंचकर हजार साल युद्ध लड़ने का बयान देकर आग में घी डालने का काम किया था. इस पर वीपी सिंह ने संसद में कहा था कि जो लोग 1000 साल तक युद्ध की बात करते हैं, उन्‍हें यह बात पता कर लेनी चाहिए कि वह 1000 घंटे युद्ध भी नहीं झेल सकेंगे और साथ ही उन्‍होंने भारतीयों से युद्ध के लिए तैयार रहने को कहा था. ऐसे में इन परिस्‍थितियों की जानकारी अमेर‍िका को भी थी. सीआईए को चिंता थी कि युद्ध में परमाणु हथ‍ियारों का इस्‍तेमाल हो सकता है. ऐसे में तत्‍कालीन बुश सरकार ने 20 डिप्‍टी एनएसए रोबर्ट गेट्स को पाकिस्‍तान और भारत की यात्रा पर भेजा. गेट्स ने पाकिस्तान को साफ कर दिया कि वह किसी भी हालत में यह युद्ध नहीं जीत सकता है और अगर युद्ध होता है तो अमेरिका उसका साथ नहीं देगा. वहीं गेट्स ने भारत को आश्‍वासन दिया कि पाकिस्‍तान अपनी सेना पीछे करने के लिए तैयार हो गया है. हालांकि पाकिस्‍तान ने ऐसा कोई आश्‍वासन नहीं दिया था लेकिन गेट्स को विश्‍वास था कि पाकिस्‍तान अमेरिका की धमकी को नजरअंदाज नहीं करेगा. इसके जवाब भारत ने साफ कर दिया था कि जब तक पाकिस्‍तान आतंकियों की मदद देना बंद नहीं करता बातचीत नहीं हो सकती. हालांकि गेट्स के दौरे के बाद दोनों देशों ने खुद ही एकतरफ़ा कदम उठाते हुए इस विवाद को उस समय के लिए खत्‍म करने की कोश‍िश की.

अमेरिका के साउथ एश‍िया के देशों खासकर भारत, पाकिस्‍तान और अफगानिस्‍तान के साथ संबंधों पर लिखी गई श्रीनाथ राघवन की किताब सुर्खियों में है. ‘The Most Dangerous Place’ में करगिल युद्ध और कश्‍मीर को लेकर भी कई नए खुलासे किए गए हैं.इस किताब में कहा गया है कि करगिल युद्ध …

Read More »