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मरीजों को भीख की तरह मिल रहा खाना, हाथों में रोटी, गिलास में सब्जी

मुरैना

स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह के जिले में मरीजों को सुबह-शाम भोजन भीख की तरह दिया जाता है। भोजन लेकर आने वाली ट्रॉली वार्ड में भर्ती मरीजों को हाथ में रोटी थमा देती है और दलिया व सब्जी मरीज को तब ही मिलता है, जब उसके पास बर्तन हो। ज्यादातर मरीज गिलास में सब्जी लेते हैं और हाथ में रोटियां। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से मरीजों को थालियों में भोजन देने की व्यवस्था है। लेकिन जिला अस्पताल ने अपनी मनमर्जी से नि:शुल्क भोजन के लिए थाली का शुल्क 50 रुपए तय कर दिया है। 50 रुपए हैं तो ही थाली में मरीजों को भोजन मिलेगा। यह 50 रुपए थाली की जमानत राशि है।

क्या है नियम
अस्पताल में मरीजों को भोजन के अलावा दूध-दलिया भी दिया जाता है। नियमानुसार मरीज को उसके बेड पर ट्रॉली से थाली परोस कर दी जाती है। इसके बाद मरीज या उसका अटेंडेंट थाली का उपयोग करते हैं और फिर धोकर वापस कर देते हैं। अगर मरीज थाली धोने में असमर्थ हैं तो इसके लिए भी अस्पताल को ही व्यवस्था करनी होती है, लेकिन जिला अस्पताल में थालियां मरीजों को मिलती ही नहीं है।

किचन में जमा करो 50 रुपए
अस्पताल में भर्ती मरीजों की मानें तो थाली या बर्तन के लिए प्रबंधन ने अपना नियम बना रखा है। इसके तहत मरीज को अगर थाली चाहिए तो उसे किचन में जाना होगा। यहां उसे 50 रुपए जमानत के तौर पर जमा करने होंगे। जिसके बाद उसे थाली मिलेगी। जब मरीज की छुट्टी होगी तो उसे थाली साफ करके जमा करनी होगी। इसके बाद ही पैसा वापस मिलेगा, नहीं तो जमानत जब्त।

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