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वॉट्सऐप ग्रुपों से हो रही थी आतंकी हमले की तैयारी

लखनऊ

राजधानी से गिरफ्तार संदिग्ध शेख अली अकबर वॉट्सऐप के नौ ग्रुपों के जरिए आतंकी साजिश का ताना-बाना बुन रहा था। एटीएस को उसके दोनों मोबाइल से ऐसे नौ ग्रुप के बारे में पता चला है, जिसके ज्यादातर सदस्य या तो पाकिस्तानी हैं या फिर कश्मीरी हैं।

एटीएस इन सभी ग्रुपों के एडमिन और सदस्यों के बारे में जानकारी जुटा रहा है। कश्मीर से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस की मदद ली जा रही है। उधर, कोर्ट ने शेख अली अकबर की 10 दिन की कस्टडी रिमांड को मंजूरी दे दी है।

हैंडलर का नाम आईएसआई एजेंट के नाम से फीड
शेख अली अकबर ने पाकिस्तान के अपने हैंडलर का नाम फोन पर आईएसआई एजेंट के नाम से फीड कर रखा है। उसने वॉटसऐप के जरिए ही दो अलग-अलग असलहों की फोटो ग्रुप पर भेजीं और पूछा कि उन्हें कौन सा असलहा चाहिए। आईजी एटीएस असीम अरुण ने बताया कि अली जिन नौ ग्रुप से जुड़ा था उनमें से हिजबुल हमारी शान है, फ्रीडम फाइटर्स, हिज्ब मीडिया, जमात-उद-दावा-कश्मीर, कश्मीर की आज़ादी, मूसा-मूसा प्रमुख ग्रुप हैं ।

ऐसा हुआ आतंकियों से कनेक्शन
जम्मू कश्मीर पुलिस ने जिन चार संदिग्धों को आतंकी गतिविधियों के आरोप में पकड़ा, अली उनके संपर्क में सितंबर 2017 को आया था। एटीएस के मुताबिक, खुद से कट्टरपंथी बना अली लंबे समय से सोशल मीडिया और इंटरनेट पर ऐसे ग्रुप के बारे में जानकारियां जुटा रहा था। उसे जहां से भी कोई मोबाइल नंबर या लिंक मिला उसने वहां संपर्क किया। इसी तरह कोशिश करने के बाद वह इन चार संदिग्धों समेत नौ आतंकी ग्रुप से जुड़ गया।

असलहा सप्लाई की कहानी में झोल
अली की असलहा सप्लाई की कहानी में एटीएस को झोल नजर आ रहा है। कश्मीर के लिए यूपी से असलहों की बात एटीएस के अधिकारियों को पच नहीं रही है क्योंकि उसे 15 दिन के अंतराल में पहले 10,000 और फिर 30,000 रुपये बैंक में ट्रांसफर हुए। अली ने बताया कि उसे एक पिस्टल करीब 20,000 रुपये की पड़ रही थी ।

छेड़खानी व पॉक्सो के तहत दर्ज हुआ था मामला
शेख अली अकबर के खिलाफ अप्रैल 2016 में गाजीपुर के जमनिया थाने में 354 और 7/8 पॉक्सो ऐक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था। हालांकि बाद में इस मामले में दोनों पक्षों में समझौता हो गया था। एटीएस के मुताबिक शेख अली सात भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर है। उसने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की है। वह जमनिया स्टेशन के पास मोईन खान के जनरल स्टोर पर काम करता था।

गिरफ्तारी से एक दिन पहले आया था लखनऊ
एटीएस के का कहना है कि अली गिरफ्तारी से एक दिन पहले लखनऊ आया था। वह चिनहट में अपने चाचा के घर पर रुका था। उसके चाचा होम्योपैथी के डॉक्टर हैं। उसने चाचा को बताया था कि वह नौकरी की तलाश में लखनऊ आया है।

आईएसआईएस से जुड़ा ग्रुप बनाने की थी कोशिश
एटीएस के मुताबिक, अली कश्मीर में पकड़े गए चार साथियों के साथ आईएसआईएस से प्रभावित होकर नया ग्रुप बनाने की फिराक में था। ये लोग हिजबुल, लश्कर व अन्य आतंकी सगंठनों से अलग अपनी पहचान बनाने की फिराक में थे। जम्मू कश्मीर पुलिस की पूछताछ में भी यह बात आई है कि इसके चलते ही वे लोग असलहे कश्मीर से खरीदने के बजाए बाहर से जुटा रहे थे।

दोस्त महबूब से पूछताछ में खुले कई और राज
अली के पड़ोसी और करीबी दोस्त महबूब अली से एटीएस पूछताछ कर रही है। महबूब के जरिए एटीएस को अली के बारें में कई अहम जानकारियां मिली हैं। साथ ही अली से पूछताछ में सामने आए कई तथ्यों की पुष्टि भी हुई है। महबूब को उसकी गतिविधियों के बारे में खासी जानकारियां थीं। उधर, एटीएस की दो सदस्यीय टीम जम्मू-कश्मीर के लिए रवाना हो गई है। यह टीम वहां पकड़े गए चारों संदिग्धों से पूछताछ करेगी ताकि यहां अली से पूछताछ के दौरान तथ्यों का सत्यापन किया जा सके।

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