झारखंड कांग्रेसः ऐसे-ऐसे के रहते कार्यकर्ताओं के लिए कैसे खुलेंगे दरवाजे के राजू जी
Vijeta कांग्रेस का दरवाजे कार्यकर्ताओं के लिए खुलेंगे. सिर्फ रांची में घूमनेवालों और हमसे मिलनेवालों को ही मौका नहीं मिलेगा कांग्रेस में. पंचायत से लेकर प्रदेश स्तर तक के नेताओं को देना होगा हिसाब. झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के राजू का बयान एक अप्रैल को हिन्दी दैनिक प्रभात खबर में है. ऊपर के सब हेडलाइंस, […]

Vijeta
कांग्रेस का दरवाजे कार्यकर्ताओं के लिए खुलेंगे. सिर्फ रांची में घूमनेवालों और हमसे मिलनेवालों को ही मौका नहीं मिलेगा कांग्रेस में. पंचायत से लेकर प्रदेश स्तर तक के नेताओं को देना होगा हिसाब.
झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के राजू का बयान एक अप्रैल को हिन्दी दैनिक प्रभात खबर में है. ऊपर के सब हेडलाइंस, उसी खबर की है.
ऐसा लगता है के राजू को यह पता नहीं चला है कि उनकी पार्टी में कैसे-कैसे नमूने भरे पड़े हैं. महत्वपूर्ण पदों पर हैं और वर्षों से जमे हुए हैं. एक कांग्रेसी ने के राजू के बयान पर कहा – ठीक है, इन्हें भी देख लेते हैं.
चलिये मान लेते हैं कि के राजू को सब पता चल गया है और वह ठीक करके ही दम लेंगे. तो क्या उन्हें यह पता चल गया है कि उनकी पार्टी के मंत्री व विधायक कार्यकर्ताओं का कितना परवाह करते हैं.
नहीं पता चला है, तो एक तरकीब करिये. पार्टी के मंत्रियों-विधायकों को अपने पास बुलाइये. उनके सारे फोन अपने सामने रखवा लीजिये और चेक कर लीजिये, कितने मिस्ड कॉल हैं और कितने को वापस कॉल किया गया. आपका दिमाग घूम जायेगा.
मिस्ड कॉल के बाद रिटर्न कॉल किसे किया गया. 90 प्रतिशत वैसे लोगों के नंबर मिलेंगे, जो ठेकेदार हैं, कोयला, बालू या पत्थर के कारोबारी हैं या दलाल किस्म के लोग होंगे.
तो क्या प्रभारी महोदय आपको पता चल गया है कि कांग्रेस में कार्यकर्ताओं की कितनी पूछ है. नहीं पता चला है कि एक बार कुछ लोगों को अपने मंत्रियों-विधायकों के घर पर सुबह-सुबह भेज दीजिये. पता चल जायेगा उनकी स्थिति क्या है. माननीय लोगों का कितने देर तक इंतजार करना पड़ता है.
चलिये, माननीयों को छोड़ दीजिये. उनका तो अलग ही जलवा है. पदाधिकारियों की बात करते हैं. एक बार पता लगाइए कि हटिया में क्यों हार गए. वो कौन पूर्व पदाधिकारी हैं, जिसने पिछले लोकसभा चुनाव में संथाल के एक भाजपा प्रत्याशी के लिए परदे के पीछे से काम किया. वह ब्राह्मण हैं, तो नहीं लेकिन ब्राह्मणों से मिलते वक्त खुद को ब्राह्मण ही बताते हैं.
के राजू जी अगर आप सच में चाहते हैं कि कांग्रेस की स्थिति सुधरे, तो एक बार पिछले दो-तीन महीनों में रांची समेत अन्य जिलों में आयोजित होने वाले सामाजिक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सूची तैयार कराइए.
फिर पता करिये कांग्रेस के किस-किस नेता को बुलाया गया. आपको दो तथ्य मिलेंगे. पहली कि उन्हें बुलाया ही नहीं गया और दूसरी यह कि बुलाया गया तो वह गए ही नहीं. गए तो सिर्फ अपने क्षेत्र के कार्यक्रमों में. ताकि अगली बार भी जीत सकें.
एक बार यह भी पता कर लीजिये कि वह कौन है, जो अब पूर्व हो चुके हैं, वह कितना वक्त संगठन व कार्यकर्ताओं को देता है औऱ कितना वक्त काले हीरे की ट्रांसपोर्टिंग में.
इतना सब करने के बाद तय कर लीजिये कि ऐसे-ऐसे महानुभावों के रहते आप पार्टी का दरवाजा कार्यकर्ताओं के लिए कैसे खोलेंगे. सिर्फ बयान देने का मामला हो तो कोई बात नहीं. वो तो छप ही जायेगा और दिख भी जायेगा, हर जगह.
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डिस्क्लेमरः यह सब छोटी-मोटी जानकारियां हैं, इस पर अमल करेंगे, तो आगे और बतायेंगे. नहीं तो आते-जाते रहिये.
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